रेडियम का चाँद
चाँद सितारे छू लेता है ये दिल…
छत पर रेडियम स्टिक्कर लगाकर.
पर सच्चाई केवल दिमाग को समझ आती है…
हरे – पीले दाग जो रात को घनी तारो भरी चांदनी का आभास देते हैं.
दिन में दिमाग का… जी हाँ दिमाग का दही बना देते हैं.
पर दिल, जो की है शायद दिमाग का ही बच्चा…
उखाड़ने नहीं देता उन टुकडो को…
और दिमाग भी चुप बैठ जाता है ये सोचकर …
की उखड़ी हुई सीमेंट छत पर भद्दी लगेगी …
अब सोये हर रात चांदनी में …
ये जानकार भी की चाँद तो क्या चाँद का टुकड़ा भी नहीं है…
या कर दे अँधेरा सारा
ताकि दिन में खाली छत पर उखड़ी हुई सीमेंट
सच्चाई से दो- चार कराये…
हाँ मेरे दोस्त दूर दूर तक नहीं है कोई चाँद..
क्यूकी हम कोटरों में रहते हैं
खुले आकाश के नीचे नहीं…
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